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Monday, December 30, 2024

एक का कचरा दूसरे का सोना: ईरान से भारत के लिए सीख

 

एक का कचरा दूसरे का सोना: ईरान से भारत के लिए सीख

एक का कचरा दूसरे का सोना ईरान से भारत के लिए सीख


एक का कचरा दूसरे का सोना: ईरान से सीख भारत के लिए

जब किसी देश की वायुसेना कमजोर हो जाती है, तो उसके सुरक्षा तंत्र की नींव हिल जाती है। ईरान के हालात इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। आज जो स्थिति ईरान में दिख रही है, वह कल भारत के लिए भी एक गंभीर समस्या बन सकती है।

ईरान की वायुसेना की बदतर स्थिति

ईरान आज भी 1960 और 1970 में अमेरिका द्वारा दिए गए पुराने लड़ाकू विमानों पर निर्भर है। 50-60 साल पुराने विमान आज भी उनकी वायुसेना का प्रमुख हिस्सा हैं। जबकि, उनके पड़ोसी देश इजराइल और अमेरिका लगातार अत्याधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों के साथ अपनी सेनाओं को मजबूत कर रहे हैं।

ईरान के पास विकल्प थे। वह रूस या चीन से विमान खरीद सकता था, लेकिन उसने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। आज हालात यह हैं कि ईरान अपनी जरूरतों के लिए पाकिस्तान से जेएफ 17 जैसे कमज़ोर और सस्ते लड़ाकू विमान खरीदने पर मजबूर है।

भारत के लिए सीख: वायुसेना की अनदेखी का खामियाजा

भारत की स्थिति भले ही ईरान जैसी खराब न हो, लेकिन वायुसेना की अनदेखी से खतरे बढ़ रहे हैं।

  • राफेल डील: एमएमआरसीए (मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के तहत 114 लड़ाकू विमान खरीदने की योजना 2008 में बनी थी, लेकिन इसे लगातार टाला गया। जब 2016 में चीन डोकलाम पर आक्रामक हुआ, तब भारत ने केवल 36 राफेल खरीदने का फैसला लिया।
  • धीमी प्रगति: 36 राफेल लड़ाकू विमान से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का मुकाबला करना आसान नहीं। इसके बावजूद भारत वायुसेना की क्षमता बढ़ाने की दिशा में धीमी गति से काम कर रहा है।

ईरान की गलती और भारत की चुनौती

ईरान के हालात से भारत को यह स्पष्ट समझना चाहिए कि वायुसेना की अनदेखी कितनी महंगी साबित हो सकती है। अगर ईरान ने समय रहते रूस या चीन से आधुनिक विमान खरीदे होते, तो उसे आज पाकिस्तान जैसे देश पर निर्भर नहीं होना पड़ता।

वर्तमान रक्षा नीति पर पुनर्विचार आवश्यक

भारत अपनी थल सेना और नौसेना के लिए लगातार बड़े कदम उठा रहा है। लेकिन वायुसेना के लिए यह अप्रोच "पूंछ में आग लगने पर ही काम करो" जैसी लगती है।
भारत को ईरान से यह सीख लेनी चाहिए कि भविष्य की सुरक्षा के लिए वायुसेना का सशक्तिकरण आज की प्राथमिकता होनी चाहिए।

निष्कर्ष

एक मजबूत वायुसेना किसी भी देश की सुरक्षा का आधार है। ईरान की कमजोर स्थिति भारत के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अगर भारत अपनी वायुसेना को मजबूत करने के प्रयास तेज नहीं करता, तो वह भविष्य में गंभीर खतरों का सामना कर सकता है।


नोट:

यह ब्लॉग भारत की रक्षा नीति और वायुसेना के महत्व पर ध्यान केंद्रित करता है। इसे साझा करके अधिक लोगों को जागरूक करें।

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